चमत्कारी खाण्डा जो सप्त धातुई तलवार है

।।गुरु जम्भेश्वर खाण्डा दर्शन रोटू नवण प्रणाम।।
आज वैशाख बदी दूज विक्रमी संवत् 2081 गुरुवार तदनुसार 25 अप्रैल, 2024 को सृष्टि के पालनहार परमपिता परमेश्वर श्रीविष्णु अवतार सदगुरु श्री जम्भेश्वर भगवान पवित्र *ऊमा नगरी, रोटू* जहाँ ऊमा को बहन मानकर उन्हें शानदार भात भर्या था। हम परिवार सहित हिसार से रोटू निज मंदिर और खाण्डै के दर्शनार्थ गये थे। निज मंदिर के दर्शन किये हवन पर बैठे मगर हमें खाण्डै के दर्शन से वंचित ही वहाँ से जाना पड़ा। अतः स्वैच्छिक *ऊमा नगरी, रोटू* विषय पर एक विशेष आलेखः
                             
             *चमत्कारी खाण्डा*
       *जो सप्त धातुई तलवार है*

सदगुरु श्रीविष्णु अवतार जम्भेश्वर भगवान ने बाल्यावस्था से ही अद्भुत और विरले चमत्कार दिखलाने शुरू कर दिये थे। जब मेड़ते का राव दूदा का राज उसके भाइयों से द्वारा छीनकर दूदा को देश निकाला दे दियाथा। तब दूदा बीकानेर जाते हुए सदगुरु श्री जम्भेश्वर की जन्मभूमि अर मातृभूमि के पास तम्बू लगाकर रात्रि विश्राम किया था। अगले दिन प्रातःकाल बाल रूप भगवान श्री जम्भेश्वर के अलौकिक कार्य अर चमत्कार देखकर दूदा ने अपने दुःख सदगुरु श्री जम्भेश्वर को सुनाया अर दुःख निवारण की प्रार्थना की।
बाल रूप सदगुरु श्री जम्भेश्वर ने एक कैर की तलवारनुमा लकड़ी राव दूदा देकर कहा जाओ वत्स तुम्हारा छीना हुआ राज्य तुम्हें वापिस मिल जायेगा। दूदाजी के मन में शंका उत्पन्न हुई कि इस कैर की तलवारनुमा लकड़ी से खोया हुआ राज वापिस कैस मिल पायेगा। अंतर्यामी परमपिता परमात्मा सर्वशक्तिमान सर्वेश्वर श्रीविष्णु अवतार श्री जम्भेश्वर भगवान ने दूदा जी के मन की बात अर उलझन को भांपकर तलवारनुमा कैर की लकड़ी को सप्तधातु की तलवार में बदल दिया और उसकी मूठ लकड़ी की रह गई। तलवार बनते ही दूदाजी की आस्था दृढ़ हो गई।
सदगुरु श्री जम्भेश्वर जी ने दूदा जी को वह खाण्डा देकर दूदैजी को लाखोलाव तालाब के पास तम्बू लगाने का आदेश दिया। वहाँ खुदाई करने पर धन-दौलत के चरू (टोकणै) मिलने की बात कही। सदगुरु जी ने कहा उस धन से उपकार अर परोपकार के कार्य करना और नीतिपूर्वक राज करने का आदेश दिया।
          दूदैजी के मेड़ता पहुँचने से पूर्व ही सदगुरु श्री जम्भेश्वरजी ने मेड़ता का राज दूदै को वापिस दिलवाने की पूर्ण तैयारी करवा दी। दूदा जी के मेड़ता पहुँचने पर ससम्मान उसे मेड़ते का राज मिल गया। राव दूदा जी ने सदगुरु श्री जम्भेश्वर जी प्रदत्त खाण्डै की पूजा-अर्चना की और आजीवन मेड़ते पर राज्य किया।
17वीं शताब्दी में राव दूदै जी की तीसरी पीढ़ी के राव जगन्नाथ एक दिन नागौर के *गूलर* गाँव में बारात में गये हुये थे। प्रसंगवश किसी ने ताना मार दिया कि- "मेड़तियो का राज तो सदगुरु श्री जम्भेश्वरजी के दीये खाण्डै की कृपा और बल से चल रहा है। तभी राव जगन्नाथ ने कहा, "हम मेड़ते का राज भुजबल (भुजाओं के बल) पर करते हैं। तभी वहाँ उपस्थितजनों के उकसाने और राजमद में चूर अज्ञानता में गुरु श्री जम्भेश्वरजी के आशीर्वाद स्वरूप दिये गये बहुत बड़े वरदानी खाण्डै से राव जगन्नाथ ने एक निरीह अर निर्दोष बकरे को काट डालने की नियत से पुरजोर वार कर दिया (जबकि सदगुरु जाम्भोजी प्रदत्त 29 नियमो में दो नियम *जीवदया पालणी-रूंख नहीं घावै* अर्थात जीवमात्र पर दया कीजिये अर हरा वृक्ष काटना तो दूर उसे घाव तक भी न करें)।
       उस निरीह अर निर्दोष बकरे पर वार करते ही खाण्डै की मूठ राव जगन्नाथ के हाथ में रह गई और खाण्डा आकाशमार्गी होकर डेगाना के पास आसोजा डूंगरी (पहाड़ी) जा गिरा और मूठ गूलर के ठाकुर के घर रह गई।
         उन्हीं दिनों बिश्नोई पंथ के महान संत, कवि, लेखक और साहित्यकार महात्मा कैसोजी गोदारा रोटू में रहते थे। रोटू में रहकर वे जाम्भाणी सतसंग किया करते थे। एक रात्रि गहरी निद्रा में सोये हुए उन्हें स्वप्न में सदगुरु श्री जम्भेश्वरजी का आदेश हुआ कि वे आसोजा डूंगरी पर जाकर वहाँ से सदगुरु का दिया वो अमरलोक का पावन खाण्डा लाओ अर पवित्र गाँव ऊमा नगरी रोटू में लाकर सुरक्षित रखवा दें। श्री केशोजी गोदारा ने सदगुरु द्वारा स्वप्न में दिये गये आदेश का अक्षरसः पालन किया अर खाण्डा लाकर ऊमा नगरी रोटू में रख दिया। बाद में वह खाण्डा रोटू में स्थित गुरु श्री जम्भेश्वर भगवान के निज मंदिर में रख दिया, जो आज भी उसी मंदिर में जन दर्शनार्थ रखा हुआ है। कहा जाता है कि सदगुरु प्रदत्त अमरलोक के उस पवित्र खाण्डै के दर्शनमात्र से ही कोटि-कोटि जन्मों के पापों और व्याधियों का पूर्णतः निवारण हो जाता है।
         मुझे यह लिखते हुए कष्ट हो रहा है कि वर्तमान में खाण्डै के दर्शन करवाने में कुछ कोताही अर्थात लापरवाही बरती जाने लगी है। कुछ लोग सदगुरु श्री जाम्भोजी के अपनी मर्जी से खाण्डै के दर्शन करवाते हैं। ऐसा चैत्र सुदी ग्यारस विक्रमी संवत् 2081 शुक्रवार तदनुसार 19अप्रैल, 2024 को प्रातः आठ बजे हमारे साथ घटित हुआ है।
हम परिवार सहित हिसार से लगभग 300 किलोमीटर चलके पवित्र ऊमा नगरी रोटू आये थे। दिनांकः18अप्रैल, 2024 को रात्रि विश्राम रोटू साथरी पे किया।
अगली सुबह नहा-धोकर दर्शनार्थ सदगुरु श्री जम्भेश्वरजी के निज मंदिर दर्शन किये, ज्योतिस्वरूपी सदगुरु के दर्शन किये मगर खाण्डै के दर्शन से वंचित ही एक घण्टा सफ़र करके मुक्तिधाम, मुकाम, सम्भराथल और पीपासर के लिये रवाना हो गये।
©
*कवि पृथ्वीसिंह बैनीवाल बिश्नोई* 
राष्ट्रीय सचिव, जेएसए, बीकानेर,
राष्ट्रीय प्रैस प्रभारी, अखिल भारतीय जीवरक्षा बिश्नोई सभा, अबोहर जिला-फाजिल्का (पंजाब)
वरिष्ठ लेखक, वरिष्ठ पत्रकार, साहित्यकार, 
पूर्व सरपंच-सीसवाल, हॉउस नं. 313, 
सेक्टर 14 (श्री ओ३म विष्णु निवास) हिसार
(हरियाणा)-125001 भारत
फोन नंबर-9518139200,
व्हाट्सएप-9467694029

   5
2 Comments

Babita patel

28-Apr-2024 11:00 AM

V nice

Reply

Mohammed urooj khan

27-Apr-2024 12:06 PM

👌🏾👌🏾👌🏾

Reply